Monday, January 5, 2009

तमस से लड़ता रहूँगा

काल को निज मुट्ठियों में बंद कर, आलोक से अनुबंध कर मैं तमस से लड़ता रहूँगा । आतंकवाद की सुनामी प्रलयगामी लहर से, मैं कब डरा हूँ । कारगिल के हिम शिखर पर चढ़ विजय का ध्वज लिए, देखो खड़ा हूँ । रोक पायेगा मुझे आकाश क्या, नित ग्रहों के भाल पर पदचिन्ह मैं जड़ता रहूँगा। \ स्रष्टि के आरम्भ से मैं मृत्यु को अगवा किए , नित हलाहल पीता रहा हूँ । सिन्धु के अमृत-कलश का दान अस्वीकार कर, मैं शान से जीता रहा हूँ। गरल तुम जितना मथोगे, नीलकंठ बना हुवा मैं , आचमन करता रहूँगा । तुम प्रलय के प्रेत जग में घोर तम से अवतरित, विध्वंस में तत्पर रहो । आतंक के ज्वालामुखी ले विश्व में सक्रिय बने, नित रक्त से खप्पर भरो । अमरत्व का वरदान मुझको, मैं सृजन का बीज हूँ, अंकुरित बढ़ता रहूँगा । दहकते अंगार बरसाते रहो , स्वर्ण हूँ तपकर स्वयं , आलोकमय कुंदन बनूँगा । भस्म कर दो सृष्टि को तुम, प्राण हूँ मैं संचारित हो , पुनः जगजीवन बनूंगा । ध्वंस पर निर्माण का संकल्प ले , मैं विजय अभियान के , सोपान पर चढ़ता रहूँगा । तुम सृजन के प्राणघातक मैं प्रकृति का प्राण-वाहक , स्रष्टि का हूँ सजग प्रहरी । पार्थ का गांडीव ले अन्याय को ललकारता हूँ, मैं न सोता नींद गहरी । कटु-प्रहारों को तुम्हारे , शक्ति-सर संधान कर मैं, विफलता मढ़ता रहूँगा । स्याह-लेखन में निरत बन,तुम कलंकित अनवरत, साहित्य को करते रहो। वांग्मय के धवल अंचल पर परत-डर-परत काजल पोत कर धरते रहो। मैं असत की चीर चादर, सत्य बंधन-मुक्त कर, हुंकार नित भरता रहूँगा। तमस से लड़ता रहूँगा। ( स्पेल्लिंग मिस्टेक्स रोमन से देवनागरी लिपि लेने के कारण हैं। क्षमा चाहूँगा ..... कमल। )

4 comments:

विनय said...

बहुत बढ़िया कविता है

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

आकांक्षा~Akanksha said...

मैं असत की चीर चादर, सत्य बंधन-मुक्त कर,
हुंकार नित भरता रहूँगा।
तमस से लड़ता रहूँगा। ......अद्भुत, भावों की सरस अभिव्यंजना. कभी हमारे 'शब्दशिखर' www.shabdshikhar.blogspot.com पर भी पधारें !!

P.N. Subramanian said...

बहुत सुंदर. आभार.
http://mallar.wordpress.com

Kamal said...

प्रिय विनय जी,आकांक्षा जी एवं सुब्रमनियन जी, आपकी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ. मेरी राय में प्रशंसा से प्रेरणा व संतुष्टि तो प्राप्त होती है पर यदि रचना पर प्रबुद्ध पाठकों द्वारा दोषों व कमियों पर आलोचनात्मक प्रकाश डाला जाय तो रचनाकार के लिए और भी उपयोगी बन सकता है. तिप्पिनीकार यदि अपना ईमेल एड्रेस भी दे तो कृतियों पर सीधा संवाद भी सुलभ बन सकता है
मेरा ईमेल < ahutee@gmail.com> है ..
सादर .....कमल ` +